होली का पर्व मनाने के प्रमुख कारण और उससे जुड़ी पौराणिक कथाएं जो आमतौर पर लोग नहीं जानते हैं

 होली का पर्व मनाने के प्रमुख कारण और उससे जुड़ी पौराणिक कथाएं जो आमतौर पर लोग नहीं जानते हैं

डॉ डीके सिंह जौनपुर



पहली कथा तो लगभग सभी जानते हैं जो होलिका केजलने  और प्रहलाद के भगवान विष्णु की कृपा से बचने की है 


लेकिन दूसरी कथा इससे भी महत्वपूर्ण है की होलिका दहन के दिन ही भगवान शिव जी ने कामदेव को जला दिया था और उसकी परम पतिव्रता पत्नी देवी रति के रोने गाने और विलाप करने पर फिर से जिंदा कर दिया था 


तीसरी कथा यह है कि सम्राट रघु के काल में एक ढुंढा नाम की राक्षसी रहती थी जो केवल गली में खेलने वाले बच्चों से असुरक्षित थी उसके लिए यह उपाय किया गया कि बच्चे लकड़ी के जलते हुए टुकड़े लेकर नगर के बाहर जाकर घास और तिनकों का ढेर लगाएं और उसमें आग लगा दे इस तरह से उसी ढुंढा नाम की राक्षसी का संघार किया गया


 चौथी और अंतिम होलिका दहन की पौराणिक कथा है कि इसी दिन पूतना का वध हुआ था लेकिन भगवान श्रीकृष्ण को दूध पिलाने के कारण वह पवित्र लोगों को प्राप्त हुई 


और पांचवी तथा अंतिम कथा राधा और कृष्ण के प्रेम के कारण ब्रज में होली की शुरुआत मानी जाती है यह प्रामाणिक कथाएं लिख दिया ताकि किसी को होली का और होली पर्व पर संदेह न रहे

या ध्यान देने की बात है कि प्राचीन काल में कहीं भी पानी में रंग घोलकर होली खेलने की प्रथा नहीं थी यह गंदा और अश्लील स्वरूप अकबर के समय में प्रचार-प्रसार में आया जो हिंदुओं को नष्ट व बर्बाद करने के लिए इसे अश्लील और व्यभिचारी स्वरूप प्रदान करके इस पर्व पर हिंदू लोगों को मांस मदिरा बांटना शुरू किया किसी भी वेद पुराण रामायण महाभारत या आरण्यक या अन्य प्रसिद्ध ग्रंथों में रंग वाली होली डीजल मोबाइल वाली मल-मूत्र वाली या अन्य अश्लील गंदी होली खेलने का कहीं जिक्र तक नहीं है

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