लायंस क्लब क्षितिज ने बच्चों को किया जागरूक ◆ मोबाइल फोन की लत बच्चों को बना रही बीमार

 लायंस क्लब क्षितिज ने बच्चों को किया जागरूक

◆ मोबाइल फोन की लत बच्चों को बना रही बीमार

◆ काम निपटाने के लिए बच्चों की मां मोबाइल देकर उन्हें बना देती हैं लती

◆ विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दो साल से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन से दूर ही रखना चाहिए।

◆ ट्रेनर लायन हसन अब्बास ने टीडीएमसी स्कूल के बच्चों में भरा जोश

वाचस्पति इंडिया न्यूज़ 

धर्मेंद्र सेठ जौनपुर 


        जनपद जौनपुर की समाज सेवा के क्षेत्र में अग्रणी संस्था लायंस क्लब क्षितिज ने लायन सेवा सप्ताह के अंतर्गत संस्थाध्यक्ष लायन प्रदीप सिंह के नेतृत्व में आज तिलकधारी मेमोरियल कॉलेज में बच्चों के बीच एक गोष्ठी आयोजित कर बच्चों को मोबाइल एडिक्शन, सेल्फ डिफेंस व अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक मोटिवेशनल ट्रेनिंग ट्रेनर लायन इंजीनियर हसन अब्बास द्वारा दी गई।





    अध्यक्ष लायन प्रदीप सिंह ने कहा अगर आपका बच्चा भी मोबाइल फोन देखने या ऑनलाइन गेम खेलने का आदी है तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज न करें। मोबाइल फोन की लत बच्चों को बीमार बना रही है। 

      पूर्व अध्यक्ष व विद्यालय प्रबंधक लायन दिलीप सिंह ने बताया बच्चे अधिकतर समय गेम खेलते हैं अथवा कार्टून देखते हैं। परिवार से बात करने के बजाये उनका समय मोबाइल पर बीतता है। कुछ क्षण की मोबाइल से दूरी होने पर घबराहट व तनाव होने लगता है। जो कि बच्चों के मानसिक विकास के लिए बहुत ही हानिकारक है।

     ट्रेनर लायन हसन अब्बास ने अभिभावकों को जिम्मेदार बताते हुए कहा माता-पिता ही अधिक समय तक मोबाइल का उपयोग करते हैं तो बच्चे भी साथ बैठकर देखते हैं। बच्चे भी मोबाइल लेकर कार्टून या गेम खेलने लगते हैं, वह भी इंटरनेट की जद में आ जाते हैं जो कि बच्चों के लिए बहुत ही हानिकारक है।

     प्रधानाचार्य अर्चना सिंह ने कहा काम निपटाने के लिए बच्चों की मां मोबाइल देकर उन्हें लती बना देती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दो साल से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन से दूर ही रखना चाहिए। दो से पांच साल के बच्चों को सप्ताह में मात्र तीन घंटे तक टीवी या मोबाइल देखने की अनुमति देनी चाहिए।

      सचिव अजीत सोनकर ने बताया बच्चों को आजकल मोबाइल की लत बहुत ही कम उम्र से लग जाती है। कई बार पेरेंट्स भी बच्चों को व्यस्त रखने के लिए फोन देते हैं लेकिन इसके परिणाम काफी घातक होते हैं। आगे जाकर बच्चों को फोन की आदत छुड़वाना पेरेंट्स के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाती है।

       यूथ अवेयरनेस ट्रेनिंग में तिलकधारी मेमोरियल कॉलेज के बच्चों प्रतिभाग किया और शपथ ली की अपने माता-पिता और अपने अध्यापकों की बातों को नजर अंदाज ना करते हुए मोबाइल का उपयोग कम से काम करेंगे। इस अवसर पर टीएमसी स्कूल के सभी टीचर्स व बच्चे उपस्थित रहे।

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