" मां भारती की पुकार" "
भारती की यही पुकार,
बंद करो ये अत्याचार ।
गंगा-यमुना की तहजीब ने, क्या तुमको यही सिखाया है। अपने ही देश के रक्षक होकर, भक्षक तुम्हें बनाया है।
क्यूं अपनी ही मातृभूमि की, इज़्ज़त को तुम रौंद रहे ।
क्यूं अपने ही घर-आंगन को, अग्निकुंड में झोंक रहे ।
तुम अपने मन की पीड़ा को, यदि शीतलता से खोलोगे।
राज्य सिंहासन धारी से, मर्यादित होकर बोलोगे ।
तो अपनी इस धरती की लाज, बचाने का अवसर तुम पाओगे।
वरना अपनी इस माँ की इज्ज़त, तुम दुश्मन देशों तक उड़ाओगे ।
अपने देश की सम्पत्ति को, क्यूं ख़ाक में मिला रहे ।
खून-पसीने की कमाई, अपनी ही तुम जला रहे
नहीं चाहिए ऐसा रक्षक, जो छाती को तपा रहे।
मेरे ही अर्भक होकर तुम, मुझको ही सुलगा रहे।।
सौम्या सिंह
एम.ए. (हिंदी)
बी.एड.
छत्रा- विद्या वाचस्पति (हिंदी)
ग्राम वन सफा पोस्ट सिकरारा सिकरारा जौनपुर


Post a Comment