*जिला अस्पताल में दुर व्यवस्थाओं के कारण मरीजों की लम्बी कतार, निजी एम्बुलेंस की हुई भरमार,*
वाचस्पति इंडिया न्यूज़
डा मिथलेश श्रीवास्तव
*जौनपुर।जनपद के अमर शहीद उमांनाथ सिंह जिला चिकित्सालय बदहाली के आँसू बहाने को मजबूर हो गया है मौजूदा समय जिला अस्पताल की हालत बद से बद्तर नजर आ रही है, बताते चले की जिला अस्पताल की ओ.पी.डी. तो सुबह 8 बजे से 2 बजे तक है लेकिन कुछ डाक्टर सुबह के 10 बजे तक भी अपनी ओ.पी.डी. कक्ष में नजर नही आते जिसके फलस्वरूप दूर दराज से आए हुए मरीज दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो जाते हैं। जैसे तैसे डाक्टर आ भी जाते है तो उपचार के लिए पहुंचे मरीजों से ऐसा व्यवहार करते है कि मानो जिला अस्पताल के डाक्टर मरीजों पर बहुत बड़ा एहसान कर रहे हैं और वही दूसरी तरफ जिला अस्पताल में मरीजों को चिकित्सक द्वारा बाहर की दवा लिखने का सिलसिला भी जोरों पर चल रहा है। अस्पताल के मरीजों को बाहर की दवा के साथ साथ प्राइवेट एम्बुलेंस से अस्पताल के मरीजों को निजी अस्पताल भेजने का कारोबार पुनः जोरों पर पनप रहा हैं जिसकी तरफ मुख्य चिकित्सा अधीक्षक का ध्यान ही नहीं जा रहा हैं। बताते चले की पूर्व के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. अनिल कुमार शर्मा के कार्यकाल के दौरान निजी एम्बुलेंस वाहन को जिला अस्पताल परिसर में घुसने तक की इजाजत नहीं थी यदि कोई एम्बुलेंस अस्पताल परिसर में दिखाई देता था तो तत्काल कोतवाली पुलिस द्वारा उक्त निजी एम्बुलेंस को कब्जे में लिया जाता था। किन्तु जब से वर्तमान मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. अभिमन्यु ने जिला अस्पताल का कार्यभार की जिम्मेदारी लिए है उसके बाद जिला अस्पताल में निजी एम्बुलेंस आए दिन दिखाई देती हैं जिसका पूरा प्रमाण अस्पताल की सीसीटीवी फुटेज में कैद है। जिला अस्पताल में जनपद के कोने कोने से मरीज आते हैं इस उम्मीद से की एक रुपया के पर्चे पर डाक्टर को दिखा कर प्रदेश सरकार द्वारा मरीजों को मिल रही मुफ्त दवा से ठीक होंगे लेकिन अपनी बीमारी से ग्रसित को क्या पता की जिला अस्पताल में मरीजों के लिए बैठे डाक्टर अपनी खुद की दुकान चलाने में मशगूल है उन्हें सरकार की सरकारी दवा नहीं लिखना है उन्हें तो बाहर के निजी मेडिकल स्टोर की दवाए लिख कर मोटी कमीशन जो लेना हैं। वही बात करते है जिला अस्पताल के जांच केन्द्र की जहाँ मरीजों की ऐसी लाइन लगती हैं जिसे देखकर ऐसा लगता हैं जैसे रेलवे के टिकट घर में यात्री टिकट की लाईन में खड़े हैं। इस प्रकार की जिला अस्पताल की स्थिति इससे पहले कभी नहीं देखी गई है।



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