Dr R P Vishwakarma
निक्षय दिवस
-हेल्थ वेलनेस केंद्रों, जिला अस्पताल सहित सभी 322 स्वास्थ्य इकाइयों पर मनाया गया निक्षय दिवस
-एचआईवी और शुगर की भी हुई जांच, आशाओं ने मरीजों को स्वास्थ्य केंद्रों तक लाने की निभाई जिम्मेदारी
जौनपुर, 16 दिसम्बर 2022 जनपद की सभी 322 स्वास्थ्य इकाइयों पर गुरुवार को निक्षय दिवस मनाया गया। इस मौके पर जनपद के वाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में आए कुल 7,879 मरीजों में से 657 मरीजों के बलगम की जांच हुई।
जिन स्वास्थ्य इकाइयों पर निक्षय दिवस मनाया गया उनमें 22 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), 84 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), शहरी क्षेत्र के तीन पीएचसी, 209 हेल्थ वेलनेस केंद्र, जिला महिला तथा जिला पुरुष चिकित्सालय, लीलावती महिला चिकित्सालय, टीबी हास्पिटल शामिल थे|
इसके लिए सभी स्वास्थ्य इकाइयों पर मरीजों के बलगम रखने के लिए स्थान निर्धारित कर कफ कार्नर प्लेस बनाए गए थे। कफ रेफरल से पहले प्रत्येक केंद्र पर संभावित क्षयरोगियों के एचआईवी और शुगर की भी जांच की गई। आशा कार्यकर्ताओं ने मरीजों को सूचित कर उन्हें स्वास्थ्य इकाइयों तक लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जिला क्षयरोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ राकेश कुमार सिंह ने कहा कि हर माह की 15 तारीख को निक्षय दिवस मनाए जाने के निर्णय से आमलोगों के बीच क्षयरोग की रोकथाम का प्रचार -प्रसार होगा। यह क्षय उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) सलिल यादव ने बताया कि सोमवार को जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में निक्षय दिवस सफल बनाने के संदर्भ में डीटीओ डॉ राकेश कुमार सिंह ने राज्य स्तर से जारी दिशा-निर्देशों की प्रस्तुति दी थी। उन्होंने जनपद के सभी चिकित्सा अधीक्षकों/प्रभारी चिकित्साधिकारियों से भी आयोजन को सफल बनाने की अपील की थी। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ), एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं को एनटीईपी के पर्यवेक्षकों और केंद्र प्रभारियों ने संवेदीकृत किया था। वहीं एक दिन पहले बुधवार को राज्य क्षयरोग नियंत्रण अधिकारी ने जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम), जिला सामुदायिक प्रक्रिया प्रबंधक (डीसीपीएम) के साथ जनपद के सभी एनटीईपी स्टाफ से अभियान को सफल बनाने की अपील की थी।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री क्षयरोग मुक्त भारत अभियान और राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जनपद में इस साल अब तक कुल 6,766 क्षय रोगियों का पंजीकरण हुआ है। इसमें 5,721 सरकारी अस्पतालों के हैं जबकि 1,045 निजी अस्पतालों के हैं। डायरेक्ट बेनीफिसियरी ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए 1.49 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। साथ ही 30 लाख रुपए का भुगतान प्रक्रिया में है।राज्य स्तर के निर्देश के तहत पब्लिक सेक्टर के अस्पतालों/डॉक्टरों से 6,000 तथा प्राइवेट के डॉक्टरों/अस्पतालों से 2500 क्षयरोगियों को खोजने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने के लिए एनटीईपी की टीमें निजी क्षेत्र के अस्पतालों/डॉक्टरों से नोटीफिकेशन बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं। क्षयरोग में सबसे जरूरी बलगम की जांच कराना है। बलगम की जांच में क्षय रोग का पता चलने पर समझना चाहिए कि क्षयरोग है। उन्होंने कहा कि क्षय रोगियों के इलाज के दौरान सरकार 500 रुपए पोषण भत्ता के रूप में देती है।

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