एक प्यारी सी कविता,प्यारा गुलाब
पहले प्यार का प्रतीक है गुलाब
मीठी सी सुगंध से महकता गुलाब
देखकर तुझे हर कोई ख़ुश हो जाये,
ऐसा ही सोना मेरे यार सा है गुलाब।
प्रेम की दस्तक दिल के आँगन में हुई,
सुर्ख़ लबों की जब लबों को छुअन हुई,
मदहोश होकर प्रेम में ख़ुद को खो बैठा,
फिर प्यारा सा गुलाब देकर तू मेरी हुई।
उस गुलाब को मैंने किताब में रख दिया,
उसकी महक को मेरे दिल में बसा लिया,
प्रेम का प्रतीक है ये गुलाब कैसे फेंक दूँ,
उसके साथ तुम्हें साँसों में है बसा लिया।
फूल के संग काँटों सी है ज़िंदगी हमारी,
तू साथ है मेरे सनम तो हर राह गुलाब सी,
साथ मिलकर सारे सपने हम सजायेंगे,
प्रेम निभाकर जिये साथ ये ज़िंदगी हमारी।
प्यारा सा आशियाना बनाकर साथ रहेंगे,
गुलाब की ख़ुशबू सा हम महका करेंगे,
मेरे घर के आँगन में ये खिलेगा याद बनकर,
हमारे प्यार की दास्तान को दोहरा करेंगे।
निशा शेठ
तंज़ानिया

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