*सुमति और कुमति* पूज्य संत स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज जी के प्रवचन से साभार

 *🌞 सुमति और कुमति 🌞*
 पूज्य संत स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज जी के प्रवचन से साभार
आइडियल इंडिया न्यूज़
लवकुश पाण्डेय कुशीनगर


 *सुमति और कुमति 🌞*
 पूज्य संत स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज जी के प्रवचन से साभार भीषण जी अपने भाई रावण को समझाते हुए कहते है कि हे भाई! सुमति और कुमति दोनों सगी बहनें है और दोनों एक साथ सबके मन में रहती है कुमति के बिना सुमति का कोई असितत्त्व नहीं है हमें दिन अच्छा ही तब लगता है जब वो रात के बाद आता है सुख की सुखानुभूति होती ही तब है जब वो दुःख के बाद आये, जिस प्रकार सुख दुःख, दिन रात साथ रहते है उसी प्रकार सुमति कुमति भी साथ रहती है।*

*अच्छा बात करें लंका की तो यहाँ भी कुमति और सुमति दोनों ही रहती है कुमति की नींद में कुम्भकर्ण सोता है और सुमति की नींद में विभीषण जी सोते है विभीषण जी भी सो रहें थे तभी तो तुलसीदास जी को लिखना पड़ा -"तेहि समय विभीषण जागा। "लेकिन रात्रि में सोने वाला राक्षस नहीं होता है निशाचर रात्रि में नहीं सोते है।*

*अब आपके पास कुमति आयेगी या सुमति यह आपके जगाने वाले पर निर्भर करती है कुम्भकर्ण को जगाया कुसंग के रावण ने और विभीषण जी को जगाया सत्संग के हनुमान जी ने, कुसंग के रावण के जगाने से कुमति मिलती है और सत्संग के हनुमान जी के जगाने से सुमति मिलती है, इसलिए आइये सुमति प्राप्त करने हेतु हम हमेशा सत्संग रूपी हनुमान जी साथ जागे तभी हम मोह रूपी निशा से सही रूप में जाग्रत हो पाएंगे।*

    *सुमति कुमति सब कें उर रहहीं।*
          *नाथ पुरान निगम अस कहहीं॥*
    *जहाँ सुमति तहँ संपति नाना।*
          *जहाँ कुमति तहँ बिपति निदाना॥"

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