आखिर पुलिस के दर्द को समझेगा कौन?अनभिज्ञ हो रही है सरकार*
*सबकी देखभाल करने वाली पुलिस की समस्याओं का हल करायेगा कौन?*
आइडियल इंडिया न्यूज़
संतोष कुमार नागर की विशेष रिपोर्ट
सोनभद्र।----------------------------
उत्तर प्रदेश में इन दिनों सियासी पारा तो अपना रुख बदला ही है वही ,पुलिस विभाग में कार्यरत तमाम अधिकारियों एवं सुरक्षा बलों की सरकारी, गैर सरकारी एवं सामाजिक व पारिवारिक अनेक समस्याओं और उसके समुचित समाधान न होने के कारण अब अपने आप को थका मज़बूर समझ लिया है। पुलिस विभाग में इन दिनों काफ़ी मायूसी छायी हुई है अपने -अपने अधिकारियों को लेकर। विभाग के कई ऐसे पुलिसकर्मी चाहे वह पुरुष पुलिस कर्मी हो या महिला पुलिस है जो अपनी समस्याओं को ले कर अधिकारी के पास जा रहे हैं अधिकांश उनकी परेशानियों को अनदेखा किया जाता रहा है। ऐसे में कहीं ऐसा ना हो कि पुलिसकर्मी थाना- चौकी का चार्ज लेने से अच्छा अपने आपको लाइन में ही रहना ठीक समझें।
*पुलिस का दर्द*
कई ऐसे जवान हैं जिनके घरों मे काफ़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, मगर ऊपर के अधिकारी उनके एप्लिकेशन को ठन्डे बस्ते में डाल देते हैं ऐसे में कहीं ना कहीं उनकी मानसिकता बदल रही ,कुछ ऐसे हैं जिनको अपने आप से सरकारी काम के रुपए देने पड़ रहे हैं कोई सुनने वाला नहीं ।और तो और पुलिस लाइन से कुछ दुरी तय करने के बाद आगे के सफऱ को तय करने को सरकार कुछ रूपये भत्ते के रूप में तय की है जो उनको मिलता ही नहीं। ड्यूटी की बात की जाए तो समूचे व्यवस्था सरकारी, गैर सरकारी संस्थाओं, सामाजिक संस्थाओं, आपराधिक मामलों एवं राजनेताओं की रैलियों की सुरक्षा व्यवस्था देखभाल किसी भी परिस्थिति में रहते हुए १२ घंटे से ज्यादा ( मशीनरी ) के रूप मे काम करना पड़ रहा है। उसके बाद भी सहुलियत के नाम पर सिर्फ मुस्तैदी के साथ ड्यूटी ही ड्यूटी पर तैनात रहना है।ऐसी परिस्थिति में बदल रही है सोच।
ऐसे में कुछ पुलिसकर्मी की सोच एकदम से बदल रही है ना हम काम करेंगे ना हमें किसी प्रकार की जिल्ल्त झेलनी है। हम पुलिस लाइन मे ही ठीक हैं और अगर ऐसे में सरकार इनका ध्यान नहीं देती तो इनके दर्द को समझेगा कौन?10:22 PM

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